2 Line Shayari | Best Collection Of Two Line Shayari

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Two Line Shayari | Best Collection Of Two Line Shayari

2 Line Shayari | Best Collection Of Two Line Shayari

 

दर्द को मुस्करा कर सहना क्या सीख लिया
सबने सोच लिया मुझे तकलीफ नहीँ होती.

 

ज़िन्दगी भीख भी देती है तो क़ीमत लेकार..
रोज़ फ़रियाद का अंदाज़ बदलते रहिए

 

“मुट्ठी दुआओं की मां ने चुपके से सिर पर छोड़ दी…
और मैं नासमझ मुकद्दर का अहसान मानता रहा

 

Aankhon mein agar ho ghuroor toh insaan ko insaan nahin dikhta……
Jaise chhat par chad jao, toh apna hi makaan nahin dikhta.

 

एक चाहत होती है किसी के साथ की जनाब.
वर्ना पता तो हमें भी है की मरना अकेले ही है..

 

हुनर काफ़ी नहीं ..तवज्जो के लिए..
थोड़े नखरे न दिखाओ..तो यहां पूछता कौन है..!!

 

*खुद का मान अगर चाहो तो औरों का भी मान रखो…*
*कहने को अगर जीभ मिली है,तो सुनने को भी कान रखो*

 

Ab K SaaL Ek Ajeeb si Khwahish Jagi Hai ‘Ekant’,
Koi Toot Ke Chahe Aur Main Bewafa Niklon…!!

 

पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं
कोई हंगामा….करो ऐसे गुज़र होगी नहीं

 

छोटी सी ज़िंदगी है किस-किस को ख़ुश करें साहब,
जलाते हैं ग़र चिराग़ तो अंधेरे बुरा मान जाते हैं!

 

ख्वाहिश बस इतनी सी है कि तुम मेरे अल्फ़ाज़ो को समझो,
आरज़ू ये नहीं कि लोग वाह वाह करें!!!

 

क्यूँ पूछते हो बेकरारी का सबब
जब जानते हो की इंतजार तुम्हारा है,

 

ईश्वर के न्याय की चक्की धीमी जरूर चलती है
पर पीसती बहुत बारीक है

 

फिक्र है सब को खुद को सही साबित करने की,
जैसे ये जिन्दगी, जिन्दगी नही, कोई इल्जाम है!!!

 

ज़िन्दगी निकल जाती है ढूँढने में कि…
ढूंढना क्या है?
अंत में तलाश सिमट जाती है इस सुकून में कि…
जो मिला, वो भी कहाँ साथ लेकर जाना है |

 

पत्थर की तरह सख्त बन जाते हैं धीरे-धीरे,
लम्हे गुज़र कर वक़्त बन जाते हैं धीरे-धीरे.

 

गुनगुनी धुप सी गुज़री है अभी अभी…
जनवरी की सुबह में यूँ ही तेरा ख्याल चला आया

 

रात भर भटका है मन मोहब्बत के पुराने पते पर,
चाँद कब सूरज में बदल गया पता ही नहीं चला.

 

*खुद से जीतने की जिद है, मुझे खुद को ही हराना है..*
*मै भीड़ नहीं हूँ दुनिया की ,मेरे अन्दर एक ज़माना है।*

 

कोई इज्जत ढँकता है, फटे चीथड़ों से…
कोई नंगा होकर मशहूर हुए जा रहा है

 

“अब पहुंची हो सड़क तुम गांव,
जब पूरा गांव शहर जा चुका है”

 

बताअो कौन सी बहार ले कर आया है जनवरी ??
तुम जो कहते थे बहुत वीरान है दिसम्बर..

 

Mein kaabil-e-nafrat hun tu chhod de mujh ko,
Tu mujh se yun dikhaawe ki mohabbat na kiya kar..

 

नई नज़्म लिखनी है, खुद की कहानी पर अब….
वो जो पुरानी थी, वो कहानी किसी गैर की है…

 

खूबसूरत ख्यालों को जो इश्क से पिरोते है
मोहब्बत करने वाले वो लोग बेहद खूबसूरत होते है !!!

 

तभी तक पूँछे जाओगे जब तक काम आओगे
चिराग़ों के जलते ही बुझा दी जाती है तीलियाँ

 

“मैं दिसंबर और तू जनवरी,,

.

.
रिश्ता काफी नज़दीक का और दूरी साल भर की!!”

रिश्ता क्या है ये जानने से अच्छा,
अपनापन कितना है ये महसूस कीजिये.

 

सर्द मौसम से कौन डरता है
सर्द लेहजों से जान जाती है

 

पसीने की स्हायी से लिखे पन्ने कभी कोरे नहीं होते
जो करते है मेहनत दर मेहनत उनके सपने कभी अधूरे नहीं होते.

 

यादों की फरमाइश भी कमाल की होती है…
सजदा वही होता है जहाँ दिल हार जाता हैं

 

कभी रज़ामंदी तो कभी बग़ावत है इश्क
प्रेम राधा का, तो मीरा की भक्ति है इश्क

 

झुकी हुई गर्दन से मोबाइल में अजनबी रिश्ते जुड़ सकते हैं…
तो हकीकत के रिश्तों में गर्दन झुका लेने में क्या हर्ज है ???

 

हर त्यौहार कुछ न कुछ बेचते नजर आते हैं……
कुछ बच्चों के “बड़े दिन” सिग्नल पे गुजर जाते हैं

 

अपने लबों से भी तो कभी आज़ाद कर ख्वाहिशें अपनी.
जरा मुझे भी तो मालूम हो मेरी तलब तुझे किस हद तक है

 

उलझे जो कभी हमसे तो, आप ‘सुलझा’ लेना….
आपके हाथो में भी एक रिश्तो का ‘सिरा’ होगा..

 

एक उम्र वो थी कि, जादू में भी यक़ीन था
एक उम्र ये है कि, हक़ीक़त पर भी शक़ है

 

कुछ आता है खुद चलकर, कुछ तक चल जाना होता है
मिलता वही है जो लिखा है, बाक़ी सब बहाना होता है

 

*मत बनाओ मुझे फुर्सत के लम्हों का खिलोना,*
*मैं भी इंसान हूँ, दर्द मुझे भी होता है..!!

 

मानना ही पड़ा कि….. इश्क हो गया है मुझे….
लोगों ने बहुत बार देख लिया था….. मुझे बेवक्त बेवजह मुस्कुराते हुए….

 

चार आने…साँस☺
बारह आने … तेरा एहसास
बस यही हैं एक रूपया जिदंगी…

 

*न सब बेखबर हैं, न होशियार सब,*
*ग़रज़ के मुताबिक हैं, किरदार सब….*

 

रहने दे मुझे यूँ उलझा हुआ सा तुझमें,

सुना है सुलझ जाने से धागे अलग अलग हो जाते हैं.!!

 

कोई तो हाल ए दिल अपना भी समझेगा
हर शख्स को नफरत हो जरूरी तो नहीं

 

काश ये इश्क भी चुनावों की तरह होता…….
हारने के बाद विपक्ष में बैठकर कम से कम दिल
खोलकर, बहस तो कर लेते..

 

कर दी मैंने नमाज अदा इनके सामने भी…
मुझे सिखाया गया था कि खुदा एक हैं….

 

नज़र अंदाज़ करते है वो..

मतलब हम नज़र में तो है…”

 

मोहब्बत करने वालों की कमी नहीं दुनियां में…..
अकाल तो….
निभाने वालों का पड़ा हुआ है.

 

दुनिया फ़रेब करके हुनरमंद हो गयी,,
हम एतबार करके गुनाहगार हो गए…

 

तुम नहीं होते हो,
बहुत खलता है….
इश्क़ कितना है तुमसे..
पता चलता है……!!

 

कुछ भी हो मैं तो इल्जाम तुम्हें ही दूंगा
तुम मासूम तो बहुत हो मगर तोबा तुम्हारी आंखें..

 

खो न देना कहीं ठोकरों का हिसाब,
जाने किस-किस को रास्ता बताना पड़े..।

 

जिसको तूफ़ान से उलझने की हो आदत “एकांत” ….
ऐसी कश्ती को समंदर भी दुआ देता है …..

 

यूँ तो सब ही रूठे रूठे से हैं मुझसे,,
पर बचपन की मासुमियत ज्यादा खफ़ा है..

 

कहाँ पूरी होती हैं दिल की सारी ख्वाहिशें…
कि दिसम्बर भी हो यार भी हो,और साथ भी हो..

 

हाल पूछा न खैरियत पूछी,
आज भी उसने,,
हैसियत पूछी…

 

मत पहनाओ इन्हे…शर्तो का लिबास,
रिश्ते तो, बिंदास ही अचे लगते है..

 

नफ़रत करते तो अहमियत बढ़ जाती उनकी
मैंने माफ़ कर के उनको शर्मिंदा कर दिया

 

कितनी दिलकश है ख़ामोशी तेरी,
मेरी साड़ी बातें फ़िज़ूल हो जैसे…

 

है रूह को समझना जरूरी,
महज हाथो को थामना साथ नहीं होता…

 

हमें पसंद नहीं जंग में चालाकी यारो…
जिसे निशाने पर रखते हैं…
बता कर रखते हैं !!

 

उड़ा देती है नींदे भी कुछ ज़िम्मेदारियां घर की
देर रात तक जागने वाला हर शख्स आशिक़ नही होता

 

अपने खिलाफ बाते बड़ी खामोशी से सुनती हूँ मैं,
ऐ दोस्तों जवाब देने का ज़िम्मा मैंने वक्त को दे रखा है !!

 

मुलाकात एक मांगी थी मैंने,
नज़ाकत तो देखिये,
रखकर लिफाफे में इक फूल उसने भेजा है,गुलाब का

 

जिस रफ़्तार से तू निकल रही है ऐ_ज़िन्दगी,
एक चालान तो तेरा भी बनता है…!!!

 

बहुत ज़ोर से हँसे थे हम ,बड़ी मुद्दतों के बाद,
आज फ़िर कहा किसी ने, “मेरा ऐतबार कीजिये!!

 

ऐ जिन्दगी ना लगने देना इश्क की तलब,
मै जीना चाहती हुँ भीड़ से अलग..

 

अच्छे रिश्तों” को …वादे… और …शर्तों…की,. जरूरत नही होती..

 

बस दो खुबसूरत लोग चाहिए,
“एक निभा सके”… और… “दुसरा उसको समझ सके!!

 

कहते है हो जाता है संगत का असर….
पर काँटों को आज तक नहीं आया, महकने का सलीका…

 

लो इबादत रखा अपने रिश्ते का नाम.
मुहब्बत को तो लोगों ने बदनाम कर दिया है..

 

खाली पन्ने और मुस्कुराता हुआ कवर….
कुछ यही कहानी है, जिन्दगी की किताब की…

 

*वो इत्र की शीशियां,*
*बेवज़ह इतराती हैं खुद पे,*
*हम तो दोस्तों के साथ होते हैं,*
*तो महक जाते हैं.!!”*

 

Faasle Aise Bhi HonGe Ye Kabhi Socha Na Tha…
Saamnae Baitha Tha Mere Or Wo Mera na Tha…

 

एक टूक……मुझको देखे जाती हैं
अपनी नज़रों पे कुछ नज़र रखिये

 

*नाराजगी भी बड़ी प्यारी सी चीज है,*
.
*चंद पलो मे प्यार को दुगुना कर देती हैं..

 

किसी खास के लिए – सुना है आजकल तेरी मुस्कुराहट गायब हो गई,
तू कहे तो फिर से तेरे करीब आ जाऊं.. ..

 

शमशान की राख देख कर मन में
एक ख्याल आया
सिर्फ राख होने के लिए इंसान जिंदगी भर
दूसरों से कितना जलता है

 

मौसम बहुत सर्द है..चलो सभी मिल के..
गलतफहमियो को आग लगाते है !!!

 

कदर करना सीख लो,ना जिंदगी वापस आती है…
ना जिंदगी में आये हुये लोग.!!

 

एहसासों के पांव नहीं होते
फिर भी दिल तक पहुंच ही जाते हैं..!!

 

*जिंदगी का बहुत सीधा सा परिचय है,*

*आँसू वास्तविक है, मुस्कान में अभिनय है।*

 

उसे सोचकर उठना और उसे सोचकर सो जाना
कितना मुश्किल है न उसकी न होकर भी उसकी हो जाना.

 

मेरी चाहतो की शाम उस दिन हसीन हो जाए ।।
जब मैं तुम्हे माँगू और
हर तरफ आमीन-आमीन हो जाए!!

 

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते!!

 

कहानियों में आपकी शामिल कुछ यूँ रहेंगे हम…
जिक्र बस एक बार सही पर्दा गिरने तक असरदार रहेंगे हम!!

 

हम से मोहब्बत का दिखावा न किया कर,
हमे मालुम है तेरे वफा की डिगरी फर्जी है..!!

 

साफ़ कह दे अगर गिला हो कोई…
फैसला,फासले से बेहतर है…

 

मोहब्बत के बाजार में हुस्न वालो की जरूरत नहीं होती
जिस पे दिल आ जाय वही खास होता है!!

 

*ज़िन्दगी की खरोचों से ना घबराइये ज़नाब,*

*तराश रही है खुद जिंदगी निखर जाने को.*

 

Ek parwah hi hai jo batati hai ki khayal kitna hai…..

Warna koi tarazu nahin hota rishton ko tolne ke liye.

 

Chalo Mana k hamein pyar ka Izhaar karna nai aata . .
Zazbaat na samajh sako, itne nadaan to tum bhi nahi . .

 

ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही ख्वाहिशों का है,
ना तो किसी को गम चाहिए और ना ही किसी को कम चाहिए।

 

वज़ह की तलाश न तब थी न अब है..
बेवज़ह तुझे याद करना आदत है मेरी!!

 

Nigaahon se qatal kar daalo,
na ho takleef dono ko..
Tumhein khanjar uthaane ki, hamein gardan jhukaane ki…!!

 

ये भीगे-भीगे से लम्हें,ये बारिशों के दिन..
ये तेरी यादों का मौसम, और फ़िर से चाय तेरे बिन!!

 

*न रुकी वक़्त की गर्दिश और न ज़माना बदला,*

*पेड़ सुखा तो परीन्दो ने ठिकाना बदला ।।।*

 

“मतलब” का वजन बहुत
ज्यादा होता है,
तभी तो “मतलब” निकलते
ही रिश्ते हल्के हो जाते है.।।

 

सिलसिले इन ख़्वाहिशों के थोड़ा और थोड़ा और,
कि गुज़रती नही ज़िंदगी कोई तमन्ना किए बगैर !!

 

हाल मीठे फलों का मत पूछिए सहाब…
हर वक्क चाक़ू की नौंक पे रहते है…

 

Pehle khushbu k mizaajon ko samajh lo ‘Ekant’

Phir Gulistan main kisi Gul se muhabbat karna……

 

Qeematain Gir Gayi’n Mohabbat Ki…’Ekant’
Aoo Ab Koi aur Kaarobaar Karein..

 

बिछड़ते वक्त मेरे ऐब गिनाये कुछ लोगों ने ……..

सोचता हूं जब मिला था तब कौन सा हुनर था मुझ में.

 

ये कैसी ख्वाहिश है कि मिटती ही नहीं..
जी भर के तुझे देख लिया फिर भी नजर हटती नहीं..

 

*बुराई को बताना “आम” लोगो की पहचान है,*

*बुराई में अच्छाई ढूढ़ना “ख़ास” लोगो की पहचान है।*

 

“घमंड की बीमारी” भी शराब जैसी है सहाब..खुद को छोड़ कर सबको पता चलता है
इसको चढ़ गयी है..

 

*मंज़िले हमारे करीब से गुज़रती गयी जनाब,*

*और हम औरो को रास्ता दिखाने में ही रह गये ।*

 

इक दुआ में अटक के रह गया है मेरा दिल

जाने क्युं तेरे सिवा कुछ और मांगा नहीं जाता!!

 

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